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16 November 2009

तम्बाकू के कुप्रभावों के बारे में जागरूकता की आवश्यकता

तम्बाकू के कुप्रभावों के बारे में जागरूकता की आवश्यकता

'तम्बाकू पदार्थों के उपभोग को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को रोकने हेतु, एवम् सुग्राही अभियान चलाने हेतु, सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों के कारण नए तम्बाकू उपभोक्ताओं की संख्या में कमी अवश्य आई है। यह एक आशावादी संकेत है, परन्तु, वर्तमान उपभोक्ताओं को सिगरेट ओर तम्बाकू की आदत से छुटकारा दिलाने के लिए, तम्बाकू से होने वाली हानियों के बारे में और अधिक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।' ये विचार हैं कोयम्बटूर के कलेक्टर श्री उमानाथ के. शहर के एक अस्पताल में तम्बाकू उन्मूलन केंद्र का उदघाटन करते समय उन्होंने कहा कि धूम्रपान को कभी भी, शराब पीने के समान, एक सामाजिक कलंक नहीं माना गया है। सिगरेट पीने वालों पर उनके परिचितों द्वारा, यह बुरी लत छोड़ने के लिए, अधिक दबाव नहीं डाले जाने के कारण भी, यह बुराई हमारे समाज में फल फूल रही है।

कलेक्टर के अनुसार, 'तम्बाकू उन्मूलन केन्द्रों की स्थापना, आज के समय की पुकार है। लोगों को तम्बाकू खाने की बुरी आदत से छुटकारा दिलाने के लिए उन्हें सहायता की आवश्यकता पड़ती है। अत: ये परामर्श केंद्र, तम्बाकू निषेध कार्यक्रम में बहुत सहायक हो सकते हैं। इस केंद्र का आम जनता के बीच खूब प्रचार करना चाहिए, ताकि लोगों को इस सुविधा के बारे में पता चल सके, और वे तम्बाकू के खतरों से स्वयं को बचा सकें।'

अस्पताल के डीन, रामकुमार रघुपति ने बताया कि यह देश का उन्नीसवां तम्बाकू उन्मूलन केंद्र है। ये केंद्र, तम्बाकू से होने वाले मु:ख, फेफडे और फ़ूड पाइप के कैंसर, एवम् ह्रदय रोगों के बारे में जानकारी वितरित करने में भी सहायक होते हैं।

तम्बाकू की हानियों को लेकर कई कानूनी लडाइयां लड़ी गयी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ६५% पुरुष धूम्रपान करते हैं, तथा २०% तम्बाकू खाते हैं। तम्बाकू उन्मूलन केंद्र की स्थापना करने का उद्देश्य है, बहुमूल्य जीवन को नष्ट होने से रोकना। केंद्र द्बारा उचित परामर्श, निकोटीन पुनर्सुधार थेरपी, और औषधि उपचार से वैयक्तिक हस्तक्षेप किया जाएगा। प्रदर्शिनी,तथा हैण्ड बिल/पर्चों के वितरण द्बारा जनता को इस बुराई के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा।

इस केंद्र की स्थापना इस बात का भी द्योतक है कि न केवल कैंसर के इलाज पर ध्यान देना ज़रूरी है, वरन उसकी रोकथाम के लिए भी आवश्यक कदम उठाने चाहिए। लगभग १२ करोड़ व्यक्ति सिगरेट पीते हैं, तथा ३ करोड़ खाने वाली तम्बाकू का प्रयोग करते हैं। प्रति वर्ष, विश्व भर में ५।५ खरब सिगरेटों का विक्रय होता है, और १० लाख लोग कैंसर से मरते हैं।

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तम्बाकूकिल्स न्यूज़ बुलेटिन
सोमवार, १६ नवम्बर २००९
अंक- ७७५
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