Latest issues of CNS Daily Tobacco News Monitoring Reports

23 December 2009

Will cancer-stricken commissioner get justice on 14 January 2010?

Will cancer-stricken commissioner get justice on 14 January 2010?
Kulsum Mustafa

Mumbai: The Commissioner of Customs at Mumbai, Deepak Kumar, and members of anti-tobacco lobby are anxiously looking forward to heralding in the New Year. On 14th January, 2010, will be pronounced a landmark judgment in the case that has already gone down in annals of history. Whatever the verdict the case is India’s first such complaint to be filed by a serving officer. 

Deepak Kumar has registered a case at Maharashtra Consumer Disputes Redressal Commission in Mumbai. on December 2.  He has demanded compensation of Rs. 1 Crore (INR 10 million or USD 200,000) from ITC Ltd, Kolkatta for severe physical damages, including loss of natural voice, incurred due to tobacco consumption without awareness of the dangers posed by the product.  

After nearly 40 years of regularly smoking cigarettes, he had developed throat cancer. Kumar's larynx – the voice box has been removed. So severe was his ailment that his treatment entailed two surgeries and radiation therapy, just to keep the cancer from spreading. The dream of the man who wanted to become an attorney after he retired from the Customs department today lies shattered. His resonant voice is gone Mr. Kumar can barely utter just a few words, and that also with great difficulty and after first covering the hole in his larynx with his palms. From his neck hangs a white gauze bib- an attempt to hide the gaping whole left by the surgery.
 “It is not money, it is not personal vendetta, I await this judgment because it is in larger interest of tobacco consumers. The consumer must know he is inhaling and chewing poison,”  Mr. Kumar told media persons at a national level media interaction organized in Mumbai by Healis Sekhsaria Institute for public Health.

The judgment Mr. Kumar hopes will make tobacco companies accountable, pressurize government bodies to curb tobacco products in India and make public aware of the ill effects of tobacco and draw attention to the hardships faced by users of tobacco.

“I have seen death, pain and suffering. On the hospital bed I took a vow- if I survive I will devote my entire life to anti-tobacco campaign. I do not want others to suffer what I have…... “ says Mr. Kumar, his voice choked with emotions. Mr. Kumar was operated in the Tata Memorial Hospital in November 2008.

Not able to take on the strain of speaking through prosthetic voice box Mr. Kumar addressed the media through power point presentation. He went on to describe his journey from a 16 year old boy, thrilled and excited at smoking his first cigarette. In the next 40 years the number increased to 40 sticks a day. In those days there was no warning about cigarette smoking being injurious to health. This came to be printed on cigarette packs only in mid eighties. "If I had made an informed choice 40 years ago, it would be a different story. But when I began smoking, which started as just a cigarette or two during my pre-college and early college days, there were no warnings. Nothing. How could I -- or the millions of others in India who started then -- have known that cigarette smoking is more addictive than heroin? It was intentionally made glamorous, through marketing. I used to smoke Wills Navy Cut, an ITC brand. I'll never forget that advertisement campaign they ran: a beautiful young girl, a handsome young man, and between them a pack of Wills Navy Cut. The slogan? Made for each other," said Mr. Kumar in a remorseful voice.

"More than anything, I regret smoking that first cigarette. Ultimately, it ruined my life. How many more lives must be ruined by tobacco in this country?" he asks, adding that education and awareness for the people is the most important step especially in India which has more tobacco users than almost any country in the world.

Kulsum Mustafa
(The author is a senior journalist and Secretary-General of Media Nest)

18 December 2009

धूम्रपान मुक्तजीवन, हार्टअटैक की संभावना

धूम्रपान मुक्तजीवन, हार्टअटैक की संभावना
लोक तेज, राजस्थान

वाशिंगटन । यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो आपको ''हार्ट अटैक' होने की संभावना बहुत ही कम है। ऐसी बातें अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में प्रकट हुई हैं। अमेरिका केस्टार्कविले शहर में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को प्रतिवंछित करने केबाद 'हार्ट अटैक' की संखया में २७ फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इस कमी को देखते हुए शोधकर्ताओं ने प्रतिबंध को राज्य भर में लगाने की सिफारिश की है। ज्ञातव्य हो कि तीन वर्ष पहले इस शहर में धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाए गए थे। प्रमुख शोधकर्ता शबर्ट मैकमिलन ने कहा, ''पहले और तीन वर्ष वाद की स्थिति का तुलनात्मक रूप से अध्ययन करने पर यह प्रकट होता है कि हृदय रोगियों की संखया में २७ फीसदी कमी आई है। इस लिए हमने इस प्रतिबंध को राज्यभर में लगाने की सिफारिश की है।'' मैकमिलन का कहना है कि धूम्रपान मुक्तकानून नागरिकों में खासा लोकप्रिय हुआ है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शुक्रवार, १८ दिसम्बर २००९
अंक- ८३१

बीड़ी-सिगरेट बेचने पर प्रतिबंध लगाने की मांग

बीड़ी-सिगरेट बेचने पर प्रतिबंध लगाने की मांग
दैनिक भास्कर, बिल्वारा, राजस्थान

कस्बे में संचालित राजकीय उच्च माध्यमिक एवं बालिका माध्यमिक विद्यालय के 100 मीटर की परिधि में बीड़ी, सिगरेट, गुटखें बिकने की शिकायत ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान जहाजपुर में विगत दिनों कलेक्टर को दी। शिकायत पर आज तक भी कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय प्रशासन की मिलीभगत के कारण विद्यालय क्षेत्र में अतिक्रर्मियों के केबिनरत, होटलें लगाकर अतिक्रमण कर रखे है ये बीड़ी, सिगरेट बेच रहे है। ग्रामीणों ने फिर से कलेक्टर को शिकायत कर बीड़ी, सिगरेट, गुटखें बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर विद्यालय क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की मांग की।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शुक्रवार, १८ दिसम्बर २००९
अंक- ८३०

17 December 2009

प्रेगनेंसी में तम्‍बाकू खाना हानिकारक

प्रेगनेंसी में तम्‍बाकू खाना हानिकारक
२४ दुनिया न्यूज़

किसी भी चीज का आदी होना गलत होता है खासकर नशीले पदार्थो का सेवन। यह बात तो जगजहिर है कि शराब,सिगरेट, तम्बाकू आदि नशे व्यक्ति के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

वहीं कई बार लोग कुछ सुनी-सुनाई बातों और भ्रम के वशीभूत हो कर नशे का प्रयोग करने लगते हैं और इसके आदती बन जाते हैं। आगे चलकर जब तक इसके दुष्प्रभाव को समझ सकें,तब तक काफी देर हो चुकी होती है और इसके घातक परिणाम सामने आते हैं।

ऐसा ही कुछ कंबोडिया में गर्भवती महिलायें भी करती हैं। वह सुबह आलस भगाने के लिये अक्सर तम्बाकू चबाती हैं। कंबोडिया में किये गये सर्वेक्षण में पाया गया कि 48 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में करीब आधी नियमित तौर पर तम्बाकू का सेवन करती हैं। शोध में यह बात सामने आयी कि पांच ग्रामीण महिलाओं में से एक को यह लत गर्भावस्था के दौरान लगी।

संगठन तथा अन्य शोधकर्ताओं द्वारा किये गये सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी कि आयायें सबसे अधिक धुंआ रहित तम्बाकू का सेवन करती हैं। उनमें से करीब 68 प्रतिशत को यह लत है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ऐसा करना जच्चा बच्चा दोनों की सेहत के लिये हानिकारक है। प्रमुख शोधकर्ता केलिफोर्निया में लोमा लिंडा विश्वविद्यालय के डॉ. प्रमिल एन सिंह के मुताबिक बड़ी उम्र के परिजनों से प्रभावित होकर लोग तम्बाकू चबाना शुरू कर देते हैं।

शोध के दौरान पाया गया कि कंबोडियाई महिलायें तम्बाकू के पत्तों को नींबू और सुपारी के साथ मिलाकर खाती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि काफी समय तक तंबाकू चबाने के कारण उनको मुंह के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। जहां तम्बाकू का सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेह होता है, वहीं इसके सेवन से उनके होने वाले बच्चे की सेहत को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए गर्भकाल के दौरान गर्भवती को हर तरह के नशे से दूर रहना चाहिए ताकि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
ब्रहस्पतिवार, १७ दिसम्बर २००९
अंक- ८२९

सिगरेट पैकेट में अब कैंसर जांच का कूपन भी

सिगरेट पैकेट में अब कैंसर जांच का कूपन भी
डेटलाइन इंडिया

नई दिल्ली, 5 दिसंबर- सिगरेट पीने वाले अब काफी लाभ में रहेंगे। जल्दी ही सिगरेट के हर पैकेट में एक सरकारी कूपन मिलेगा जिससे आप किसी भी अस्पताल में जा कर जांच करवा सकते हैं कि आप कैंसर के शिकार तो नहीं है या कैंसर आपके शरीर में जड़े तो नहीं जमा रहा है। आम तौर पर इस तरह की पड़ताल के लिए पांच हजार रुपए देने पड़ते हैं मगर सिगरेट पीने वालों को तीस से ले कर सौ रुपए तक के पैकेट में यह कूपन मिलेगा। सरकार ने इसे सिगरेट छुड़वाने का एक निर्णायक कदम बताया है लेकिन अस्पताल वालों के लिए यह काफी घाटे का सौदा साबित होने वाला है। लोगों को तम्बाकू उत्पादों के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार की और पहल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नई योजना पर अगर मुहर लग जाती है तो जल्द ही लोगों को सिगरेट के डिब्बों में एक फ्री कूपन मिलेगा। इस कूपन को दिखाकर किसी भी कैंसर अस्पताल में कैंसर का चेकअप कराया जा सकता है। मालूम हो कि सरकार इस बात पर बार-बार जोर देती है कि सिगरेट से कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अब इस संदेश को और कारगर बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक नई योजना बना ली है। इस योजना के तहत सिगरेट के डिब्बों से कैंसर का चेकअप कराने का कूपन मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मिलकर इस मुहीम को शुरू किया है। मेनका गांधी ने सुझाव दिया है कि सिगरेट बेचने वाली कंपनियों को पैकेट में फ्री कूपन देना चाहिए। हमारे देश में हर साल करीब 9 लाख लोग सिगरेट की वजह से कैंसर के शिकार होकर दम तोड़ देते हैं। इससे पहले लोगों को तम्बाकू उत्पादों के खतरे से आगाह करने के लिए डिब्बों पर बिच्छू की तस्वीर छापने का फैसला किया जा चुका है लेकिन ये तरीका भी बहुत कारगर साबित नहीं हुआ। ज्यादातर लोगों का मानना है कि सिर्फ तस्वीरें दिखाकर किसी को खतरे का एहसास नहीं कराया जा सकता। हो सकता है सरकार की इस नई पहल से लोग सिगरेट से होने वाले खतरों के प्रति जागरूक हो जाएं और सिगरेट छोड़ दें।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
ब्रहस्पतिवार, १७ दिसम्बर २००९
अंक- ८२८

धू्रमपान के लिए जुर्माना वसूला

धू्रमपान के लिए जुर्माना वसूला
दैनिक भास्कर, नादौन , हिमाचल प्रदेश

पुलिस ने सार्वजनिक स्थलों पर बीड़ी सिगरेट पीने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एएसआई सोमदत्त के नेतृत्व में पुलिस ने सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने के आरोप में 7 लोगों के चालान काट कर उनसे 1400 रुपए जुर्माना वसूला है। थाना प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने हिदायद दी है कि धूम्रपान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
ब्रहस्पतिवार, १७ दिसम्बर २००९
अंक- ८२७

16 December 2009

सिगरेट पैकेट पर छपी चेतावनी धूम्रपान को करती है प्रेरित!

सिगरेट पैकेट पर छपी चेतावनी धूम्रपान को करती है प्रेरित!
एनडीटीवी न्यूज़, नई दिल्ली, दिल्ली

सिगरेट के पैकेटों पर मौत की चेतावनी के इस्तेमाल के खिलाफ सलाह देते हुए एक अंतरराष्ट्रीय दल ने दावा किया है कि यह संदेश वास्तव में धूम्रपान करने वाले लोगों को इसके लिए और प्रेरित करते हैं।

अमेरिका, स्विट्जरलैंड और जर्मनी के मनोवैज्ञानिकों के एक अध्ययन के अनुसार, ‘सामान्य तौर पर जब धूम्रपान करने वाले लोग सिगरेट के पैकेटों पर मौत की चेतावनी संबंधी संदेश देखते हैं तो वे इसे एक चुनौती के तौर पर लेते हैं और उनके मन में जोखिमभरे धूम्रपान की आदत को बनाए रखने के लिए जोर पकड़ती है।’ मनोवैज्ञानिकों ने पाया कि जो चेतावनियां मौत से न जुड़ी हों, जैसे ‘धूम्रपान करने से आप कुरूप हो सकते हैं’ या ‘धूम्रपान के कारण आप और आपके आस-पास मौजूद लोगों को गंभीर नुकसान हो सकता है’, तो इस प्रकार की चेतावनियां इस आदत को बदलने में अधिक कारगर साबित हो सकती हैं।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
बुधवार, १६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२६

हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया..

हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया..
प्रातःकाल, उदयपुर, राजस्थान

सिंगापुर। सिगरेट पीने वालों का अंदाज कुछ यूं ही होता है.. वे हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाले अंदाज में इतने डूब जाते हैं कि उन्हें मौत का डर भी नहीं लगता। उल्टे होता यह है कि अपने साहस का यह अंदाज उन्हें मौत को चुनौती देने जैसा लगता है.. और वे सिगरेट पीने के प्रति अधिक आकर्षित होते हैं। यह बात एक शोध में कही जा रही है। सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है जैसी चेतावनी का धूम्रपान करने वालों पर कोई असर नहीं होता। अमेरिका, स्विट्जरलैंड और जर्मनी में मनोवैज्ञानिकों ने यह शोध किया है।

इसी शोध में यह नई बात सामने आई कि धूम्रपान के शौकीनों को अगर बताया जाय कि सिगरेट पीने से उनका शरीर बेडौल हो जाएगा या फिर उनके प्रिय और नजदीकियों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा, तो इन बातों का उन पर ज्यादा असर होता है। शोध के मुताबिक, युवा इन बातों को जल्दी समझ जाते हैं। युवाओं में यह आम धारणा होती है कि सिगरेट पीने से सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।

अध्ययन के अनुसार, आम तौर पर धूम्रपान करने वालों को ये चेतावनियां उनकी आदत छुड़ाने की जगह उन्हें और अधिक उकसाती हैं। यह अध्ययन 17 से 41 साल के लोगों के बीच किया गया। ये सभी सिगरेट के जबरर्दस्त शौकीन थे।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
बुधवार, १६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२५

सिगरेट से खतरा की फर्क पैंदा!

सिगरेट से खतरा की फर्क पैंदा!
दैनिक भास्कर, भोपाल, मध्य प्रदेश

लंदन. अभी तक यही समझा जाता था कि सिगरेट से होने वाली बीमारियों के खतरे बारे अगर चेतावनियों को पैकेटों पर लिख दिया जाए तो शायद लोगों में सिगरेट पीने की आदत कम हो सकती है। परन्तु देखने में बिलकुल इसके विपरीत तथ्य सामने आए हैं।

एक अध्ययन के मुताबिक चेतावनियों को नजरअंदाज करने की यह आदत टीनएजर्स में ज्यादा पाई गई है और वे सिगरेट का धुआं उड़ाने में अपनी शान समझते हैं। देखा गया है कि इन टीनएजर्स को जब भी सिगरेट पीने से होने वाले खतरों में मौत के खतरे से भी आगाह करवाया गया तो उन्होंने इस चेतावनी को अनसुना कर दिया। यह अध्ययन अमरीका, स्टिरजरलैंड तथा जर्मनी में उन लोगों पर किया गया जिनकी आयु 17 से 41 वर्ष के बीच थी। मिले उत्तरों के आधार पर लगभग आधे लोगों ने कहा कि वे सिगरेट पीने से फेफड़ों का कैंसर होने और उससे होने वाली मौत के खतरे को कुछ नहीं समझते। जबकि बाकी ने कहा कि वे इस चेतावनी को सिगरेट पीने का एक आकर्षण मानते हैं।

इस अध्ययन में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि अगर सिगरेट पीने वालों कों यह चेतावनी दी जाए कि ‘सिगरेट आपको अनाकर्षक बनाती है’ तो वे इससे काफी हद तक डर सकते हैं।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
बुधवार, १६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२४

06 December 2009

तंबाकू सिगरेट का सुरक्षित विकल्प नहीं है चीनी हर्बल सिगरेट

तंबाकू सिगरेट का सुरक्षित विकल्प नहीं है चीनी हर्बल सिगरेट
हिन्दी न्यूज़, इंडिया

अध्ययन दल चीन के एक नगर में 135 हर्बल व 143 नियमित सिगरेट का सेवन करने वाले लोगों पर शोध के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा। दल ने अध्ययन में शामिल लोगों के पेशाब के नमूने और प्रश्नावली को आधार बनाया। आश्चर्य की बात है कि हर्बल व तंबाकू सिगरेट का सेवन करने वाले लोगों में निकोटिन व कारसिओजेनस की मात्रा में कोई अंतर नहीं मिला।

अध्ययन के दौरान 47 फीसदी लोगों ने हर्बल सिगरेट अपनाने का कारण उसका बेहतर स्वाद बताया और मात्र 24 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य [^] के विकल्प के रूप में इसे अपनाया है। दल में शामिल लोगों ने बताया कि हर्बल को अपनाने के बाद प्रति दिन उनके सेवन की मात्रा भी बढ़ गई है।

अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के दवा विभाग के प्रोफेसर स्टेंटोन ए.ग्लैंटज ने कहा कि यह अध्ययन लोगों के इस भ्रम को तोड़ेगा कि हर्बल सिगरेट, तंबाकू से बचाव [^] का बेहतर विकल्प है।

उन्होंने हर्बल सिगरेट के उत्पादन में लगे उद्योगों को सलाह दी कि वे लोगों को भ्रमित करने से बचें। उल्लेखनीय है कि चीनी हर्बल सिगरेट देश के अलावा विदेशों में काफी [^] लोकप्रिय [^] है। अध्ययन दल के मुताबिक यह मानना अनुचित होगा कि हर्बल सिगरेट में निकोटिन की मात्रा कम होती है और इसमें कैंसर को रोकने वाले तत्व मौजूद रहते हैं।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२३

हुक्का पीना भी नुकसानदेह: अध्ययन

हुक्का पीना भी नुकसानदेह: अध्ययन
समय लाइव न्यूज़, नॉएडा, उत्तर प्रदेश

वाशिंगटन। आमतौर पर माना जाता है कि हुक्के से धूम्रपान करना अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह होता है लेकिन एक नये अनुसंधान में दावा किया गया है कि हुक्का भी सिगरेट की तरह ही घातक होता है।

वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार हुक्का पीने से भी लोगों को कार्बन मॉनो ऑक्साइड और निकोटीन से दो चार होना पड़ता है। जो विषैले पदार्थ सिगरेट पीने से शरीर में जाते हैं। इसके कारण निकोटीन की लत लग सकती है और हृदय संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।

प्रमुख शोधकर्ता थामस ईजनबर्ग ने कहा कि वाटरपाइप के जरिये तंबाकू के धुंए का लुत्फ उठाने वाले कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह से धूम्रपान करने से कम नुकसान होता है।
उन्होंने कहा इस तरह ये नतीजे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये पुराने मिथकों को तोड़ते हैं। ईजनबर्ग ने कहा हमें उम्मीद है कि डॉक्टर और सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी इन परिणामों का इस्तेमाल करेंगे और वाटरपाइप से धूम्रपान करने वालों को जानकारी देंगे कि उन्हें भी तंबाकू में मौजूद निकोटीन की आदत लग सकती है और हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२२

अब सिगरेट के डिब्बों में मिलेगा फ्री कूपन...

अब सिगरेट के डिब्बों में मिलेगा फ्री कूपन...
आईबीएन ख़बर, नई दिल्ली, दिल्ली

नई दिल्ली। लोगों को तम्बाकू उत्पादों के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार की और पहल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नई योजना पर अगर मुहर लग जाती है तो जल्द ही लोगों को सिगरेट के डिब्बों में एक फ्री कूपन मिलेगा। इस कूपन को दिखाकर किसी भी कैंसर अस्पताल में कैंसर का चेकअप कराया जा सकता है।

मालूम हो कि सरकार इस बात पर बार-बार जोर देती है कि सिगरेट से कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अब इस संदेश को और कारगर बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक नई योजना बना ली है। इस योजना के तहत सिगरेट के डिब्बों से कैंसर का चेकअप कराने का कूपन मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मिलकर इस मुहीम को शुरू किया है। मेनका गांधी ने सुझाव दिया है कि सिगरेट बेचने वाली कंपनियों को पैकेट में फ्री कूपन देना चाहिए।

गौरतलब है कि हमारे देश में हर साल करीब 9 लाख लोग सिगरेट की वजह से कैंसर के शिकार होकर दम तोड़ देते हैं। इससे पहले लोगों को तम्बाकू उत्पादों के खतरे से आगाह करने के लिए डिब्बों पर बिच्छू की तस्वीर छापने का फैसला किया जा चुका है लेकिन ये तरीका भी बहुत कारगर साबित नहीं हुआ।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि सिर्फ तस्वीरें दिखाकर किसी को खतरे का एहसास नहीं कराया जा सकता। हो सकता है सरकार की इस नई पहल से लोग सिगरेट से होने वाले खतरों के प्रति जागरूक हो जाएं और सिगरेट छोड़ दें।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२१

गर्भवर्ती महिलाएं आलस भगाने को चबाती हैं तंबाकू

गर्भवर्ती महिलाएं आलस भगाने को चबाती हैं तंबाकू
हिंदुस्तान लाइव न्यूज़, नई दिल्ली, दिल्ली

कंबोडिया में गर्भवती महिलाएं सुबह आलस भगाने के लिए अक्सर तंबाकू चबाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस जानकारी के बाद आगाह किया है कि ऐसा करना जच्चा-बच्चा दोनों की सेहत के लिए खराब है।

कब्बोडिया में किये गए सर्वेक्षण के अनुसार 48 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में करीब आधे नियमित तौर पर तंबाकू का सेवन करती हैं और पांच ग्रामीण महिलाओं में से एक को यह लत गर्भावस्था के दौरान लगी। संगठन तथा अन्य शोधकर्ताओं द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता लगा कि आयायें सबसे अधिक धुंआ रहित तंबाकू का सेवन करती हैं। उनमें से करीब 68 प्रतिशत को यह लत है।

प्रमुख शोधकर्ता केलिफोर्निया में लोमा लिंडा विश्वविद्यालय के डा़. प्रमिल एन सिंह के अनुसार, बड़ी उम्र के परिजनों से प्रभावित होकर लोग तंबाकू चबाना शुरू कर देते हैं। कम्बोडियाई महिलाए तंबाकू के पत्तों को नींबू और सुपारी के साथ मिलाकर खाती हैं। काफी समय चबाने से उनको मुंह के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८२०

राजधानी को बनायें धूम्रपान मुक्त

राजधानी को बनायें धूम्रपान मुक्त
अमर उजाला, लखनऊ, उत्तर प्रदेश




















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१९

धूम्रपान रहित लखनऊ के लिए जनप्रतिनिधियों से अपील

धूम्रपान रहित लखनऊ के लिए जनप्रतिनिधियों से अपील
स्वतंत्र चेतना, लखनऊ, उत्तर प्रदेश




















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१८

धूम्रपान रोकने के प्रभावी कदम उठाये जाएंगे: सुखदेव

धूम्रपान रोकने के प्रभावी कदम उठाये जाएंगे: सुखदेव
राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश




















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१७

युवाओं में तम्बाकू के प्रति बढती ललक के पीछे संकृति से विमुख होना भी

युवाओं में तम्बाकू के प्रति बढती ललक के पीछे संकृति से विमुख होना भी
स्वतंत्र भारत, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१६

धूम्रपान से स्वाहा हो रही लाखों जिंदगियां

धूम्रपान से स्वाहा हो रही लाखों जिंदगियां
हिंदुस्तान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश




















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१५

स्वजन शिक्षण संस्थान ने कैंसर पर संगोष्टी आयोजित की

स्वजन शिक्षण संस्थान ने कैंसर पर संगोष्टी आयोजित की
वाइस ऑफ़ लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१४

उत्तर प्रदेश वोलंटरी हेल्थ असोशिएशन ने आयोजित की कार्यशाला

उत्तर प्रदेश वोलंटरी हेल्थ असोशिएशन ने आयोजित की कार्यशाला
वाइस ऑफ़ लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
















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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
इतवार, ०६ दिसम्बर २००९
अंक- ८१३

Rajbhar for strict enforcement of anti-smoking law

Rajbhar for strict enforcement of anti-smoking law
The Pioneer, Lucknow, Uttar Pradesh

Responding to TB, HIV, COPD and tobacco smoking needs coordinated approach

Responding to TB, HIV, COPD and tobacco smoking needs coordinated approach

Tobacco smoking, TB, HIV and chronic obstructive pulmonary disease (COPD) are all burgeoning problems in resource poor settings. The evidence of their potentially devastating effects on global public health is increasing and they require a coordinated approach for control. These diseases all occur in predominantly resource-poor countries. They are perpetuated by poverty and inadequate resources and their control and management require coordinated approach for control, said delegates at the 40th Union World Conference on Lung Health, in Cancun, Mexico.

Statistically, there is 1 TB-related death that takes place every 18 seconds, 1 HIV death every 16 seconds and 1 smoking-related death every 13 seconds. The enormous public challenge posed by the combined epidemics of tobacco smoking, HIV, TB and COPD, is undoubtedly alarming. But is there a link between TB, HIV, COPD and tobacco smoking? Do they increase the risk of each other?

"At the beginning of 21st century we really are facing convergence of several epidemics like HIV, TB, COPD and tobacco smoking among others" said Richard N van Zyl-Smit work works with Lung Infection and Immunity Unit, Division of Pulmonology and UCT Lung Institute, Department of Medicine, University of Cape Town, South Africa.

"Tobacco smoking is unquestionably the primary risk factor for COPD. The importance of "total burden of inhaled particles" (occupational, household, environmental) is increasing" said Richard.

"Smokers have two fold higher risk of developing active TB disease" said Dr Madhukar Pai from McGill University and Montreal Chest Institute in Canada. Dr Pai was referring to three meta-analysis studies from 2007/2008. "Tobacco smokers have 2 times more risk of dieing of TB" added Dr Pai, referring to the data from India. India has enormous tobacco use and COPD rates, and also the highest TB burden in the world. "It is not a universal estimate, and is population specific" cautioned Dr Pai, outlining the need for more research on the association between TB, tobacco smoking, COPD and HIV. "There is very little data to study association between TB and passive smoking" said Dr Pai. However there are studies to show that passive smoking escalates risk of developing active TB disease by three times. "How can passive smoking have higher risk (three times) for developing active TB disease than active smoking (two times), so we do need more data in this regard" said Dr Pai.

Tobacco smoke increases the risk of pneumonia, influenza, menningococcal meningitis, among others. Evidence is accumulating that smoking is a risk factor for TB. However there is no published data on the cellular interactions of tobacco smoke and mycobacterium tuberculosis, said Richard.

At least 15 more studies have been published since the three major meta-analyses in 2007/2008. All studies report a positive association between tuberculosis and tobacco smoking. Studies also show that current male smokers have a higher risk for active TB disease than former smokers. In a study conducted in India, 900 non-medical staff monitored 1.1 million people for 3 years for cause of death taking place in this population. TB was the biggest cause of death reported in this study in India, and 66% of those who died of TB during the study, were active smokers.

The risk to develop active TB disease is higher when tobacco smoking is combined with alcohol.

"Mortality rates, particularly from Asian countries suggest that there is an urgent need to target TB patients for smoking cessation interventions" said Dr Pai. However he stressed that tobacco cessation should be encouraged regardless in all disciplines of medicine because of proven public health outcomes.

The second edition of the International Standards of Tuberculosis Care (ISTC), which is an official component of the WHO Global Stop TB Strategy also mentions tobacco smoking cessation among other measures to improve TB treatment outcomes. The ISTC standard 17 says: "This plan should include assessment of and referrals for treatment of other illnesses with particular attention to those known to affect treatment outcome, for instance care for diabetes mellitus, drug and alcohol treatment programs, tobacco smoking cessation programs, and other psychosocial support services, or to such services as antenatal or well baby care.

Dr Donald Enarson stressed that tobacco smoking cessation is an important part of the comprehensive tobacco control programme, and not the only part. So all components of the comprehensive tobacco control measures should be implemented for improving public health outcomes. Dr Enarson was referring to MPOWER report from Tobacco Free Initiative (TFI) of WHO which outlines the MPOWER package, a set of six key tobacco control measures that reflect and build on the WHO Framework Convention on Tobacco Control (FCTC, global tobacco treaty). Another delegates remarked that MPOWER is in line with the global tobacco treaty - FCTC - and we should be demanding implementation of the treaty to which governments have committed to enforce. The WHO FCTC is the first public health and corporate accountability treaty, said a delegate from India. Comprehensive tobacco control programmes can yield major public health outcomes, as 30% of male TB patients die of tobacco smoking.

Although lethal association between tobacco smoking, COPD and TB was becoming clear, we needed more discussion on association between smoking with HIV. "Tobacco smoke increases the risk of human papiloma virus (HPV) and HPV increases the risk of HIV" said Richard in response to a question on the link between HIV and smoking.

Kristina Crothers from Department of Internal Medicine, Yale School of Medicine in USA, shed more light on this association with HIV. She was referring to long term complications of HIV and progression to AIDS, which does get influenced by the above risk factors.

TB continues to be the biggest cause of mortality among people living with HIV (PLHIV) worldwide. However, HIV related long-term complications get aggravated by noxious agents which include tobacco smoke. The risk to develop pulmonary infections and respiratory tract colonization is also upped. The history of childhood illnesses, low socio-economic status, malnutrition among PLHIV does increase their vulnerability to further severe the HIV-related long-term complications. All these are contributing factors for PLHIV to develop chronic lung disease, and COPD in case of smokers, among other conditions that include fibrosis, pulmonary hypertension and lung cancer.

Kristina cited smoking prevalence among PLHIV in northern America. Although tobacco smoking prevalence among general population in USA is 22%, yet the tobacco smoking prevalence goes up among PLHIV to 54%.

In India, in a study conducted by Tuberculosis Research Centre at Madurai, the following results were reported: 66% of PLHIV men were smokers.

In another study, those PLHIV who reported 12 pack years of smoking, had 37% of emphysema, and those who reported 25 pack years of smoking, had 46% of emphysema.

"HIV is associated with chronic lung disease, particularly COPD" said Kristina. "This chronic lung disease can substantially contribute to morbidity and mortality" added Kristina. However long term impact of HIV infection on lung health is unknown, said she.

Studies show that smoking may impact progression to AIDS among PLHIV, said Kristina.

Although more research and data may further clarify the lethal synergy between the epidemics of TB, HIV, tobacco smoking and COPD, among other public health challenges, there is no doubt that collaboration between different single disease or health programmes will be truly beneficial and have major public health outcomes.

05 December 2009

नकली सिगरेट बनाने का कारखाना पकड़ा

नकली सिगरेट बनाने का कारखाना पकड़ा
२४ दुनिया न्यूज़, इंडिया

गुप्त सूचना पर अचूक कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शेखपुरा में नकली सिगरेट बनाने का बड़ा कारखाना पकड़ा है। यह कारखाना शहर के गिरीहिंडा कच्ची सड़क किनारे एक मकान में काफी दिनों से चलाया जा रहा था। पुलिस प्रवक्ता सह एसडीपीओ संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि शेखपुरा के थानाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई कर इस छापेमारी में भारी मात्रा में तैयार नकली सिगरेट, कंपनी का रैपर, सिगरेट बनाने का।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शनिवार, ०५ दिसम्बर २००९
अंक- ८१२

छरहरी काया के लिए नो स्मोकिंग

छरहरी काया के लिए नो स्मोकिंग
वेब दुनिया न्यूज़, इंडिया

धूम्रपान करने वाली महिलाएँ कृपया ध्यान दें। आप जितनी भी डायटिंग कर लें, खूबसूरत छरहरी काया आपको तभी नसीब होगी जब आप सिगरेट से तौबा कर लें। एक शोध से तो यही जाहिर हुआ है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के फिन्बर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने पाया कि वजन घटाने की कोशिश में लगी जिन महिलाओं ने सिगरेट को अलविदा कहा, वे बेहतर ढंग से अपनी चर्बी को भी कम करने में सफल हुईं।

यह नई खोज अभी तक के उस क्लीनिकल दिशानिर्देश के ठीक उलट है जिसमें डायटिंग के दौरान महिलाओं को धूम्रपान न छोड़ने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता रहा है कि इससे धूम्रपान की लत छूटती नहीं।

अब तक ऐसी धारणा रही है कि व्यक्ति एक समय में स्वास्थ्य संबंध एक ही आदत को सुधार सकता है लेकिन इन खोजों ने साबित किया है कि स्मोकिंग और ढेर सारा खाना खाने की लत से आप एक साथ निपट सकते हैं। शोधकर्ता बोनी स्प्रिंग ने कहा, 'कई सारे अध्ययनों से यह बात जाहिर हुई है कि डायटिंग के दौरान जिन महिलाओं ने धूम्रपान से तौबा किया, वे इस लत से उबरने में ज्यादा कामयाब रहीं।' एडिक्शन’ जर्नल में छपे इस शोधपत्र के लिए स्प्रिंग ने 1991 से 2007 के बीच धूम्रपान करने वाले 2,233 लोगों पर किए गए 10 अध्ययनों को आधार बनाया।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शनिवार, ०५ दिसम्बर २००९
अंक- ८१२

Study on air quality monitoring

Study on air quality monitoring
The Telegraph, Kolkata, West Bengal

Smoke free guideline

Smoke free guideline
The Telegraph, Kolkata, West Bengal


04 December 2009

धूम्रपान के खिलाफ हरमन बावेजा

धूम्रपान के खिलाफ हरमन बावेजा
वेब दुनिया न्यूज़, इंडिया

रीयल लाइफ में हरमन को धूम्रपान नहीं करते हैं, लेकिन पैन नलिन की फिल्म ‘इको ऑफ इको’ के लिए उन्हें एक दृश्य में सिगरेट पीना थी। इस ‍सीन को फिल्माते समय ‍हरमन को परेशानी का सामना करना पड़ा।

शूटिंग के दौरान उपस्थित एक यूनिट मेंबर का कहना है कि हरमन धूम्रपान के खिलाफ हैं और वे चाहते हैं कि पूरी दुनिया में धूम्रपान पर बंदिश लगा देनी चाहिए। पहली सिगरेट जलाते समय उन्हें अलग ही तरह का अनुभव हुआ। हरमन ने उँगलियों के बीच सिगरेट को फँसाया और जिस तरफ से कश खींचा जाता है उस ओर से सुलगाने लगे।
‘ग्लोबल वार्मिंग’ के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हरमन यथासंभव कोशिश करते हैं। हरमन का मानना है कि यदि एक ही जगह सभी को जाना हो तो बजाय अलग-अलग कारों के जाने के सभी को एक ही कार में जाना चाहिए।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शुक्रवार, ०४ दिसम्बर २००९
अंक- ८११

सिगरेट की लत यानी मौत की दस्तक

सिगरेट की लत यानी मौत की दस्तक
वेब दुनिया न्यूज़, इंडिया

एक शोध के मुताबिक अगर आप उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जूझने के बावजूद सिगरेट पीते हैं तो आपकी आयु दस साल घट सकती है। ब्रिटेन में हुए एक शोध में 19 हजार नौकरशाहों पर नजर रखी गई जिनकी उम्र 40 से 69 साल के बीच थी और ये देखा गया कि 38 वर्षों के बाद उनका स्वास्थ्य कैसा है?

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक उक्त रक्तचाप और कॉलेस्ट्रॉल होते हुए सिगरेट पीने की लत के कारण मौत, स्वस्थ लोगों की तुलना में दस साल पहले ही दस्तक दे सकती है। 1967-70 में इस शोध की शुरुआत तब हुई थी जब ब्रिटेन में हृदय रोग एक महामारी की तरह फैला था। जिन 19 हजार लोगों पर शोध किया गया है, उनकी जाँच जब 40 साल बाद हुई तब पता चला कि उनमें से 13 हजार पाँच सौ लोगों की मौत हो चुकी है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि 40 से ऊपर की उम्र वाले पुरुषों को अपने हृदय की जाँच करानी चाहिए।

खतरे क्या हैं?
ऑक्सफोर्ड विश्विद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में खतरे के पैमाने के तौर पर सिगरेट पीने, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल पर जोर दिया क्योंकि दिल की बीमारी के लिए ये ही खतरनाक माने जाते हैं। इसके बाद खतरों के पैमाने को बढ़ाया गया और उसमें मोटापे, मधुमेह और रोजगार के स्तर को शामिल किया गया।
इसके बाद पाँच प्रतिशत ऐसे लोग, जिनमे खतरे के पैमाने सबसे ज्यादा थे, और पाँच प्रतिशत वो, जिनमे खतरे के पैमाने कम थे, के बीच तुलना की गई। इसमें पाया गया कि दोनों के बीच की औसत उम्र में 15 सालों का फर्क था।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शुक्रवार, ०४ दिसम्बर २००९
अंक- ८१०

03 December 2009

बेकहैम के सपनों में आती है वो

बेकहैम के सपनों में आती है वो
दैनिक भास्कर, भोपाल, मध्य प्रदेश

लंदन. ब्रिटिश फुटबॉल स्टार डेविड बेकहैम के सपनों में कौन आता है जरा सोचिए चलिए हम ही बता देते हैं। खबर है कि उन्होंने सिगार के लिए अपने दिलोदिमाग में फंतासी बनाई है। द सन आनलाइन के मुताबिक 34 साल के मिडफील्डरको जब उनकी पत्नी स्पाइस गर्ल विक्टोरिया ने घर में सिगरेट पीने से मना किया तो वे बाहर निकल आए और बगीचे में बैठ क्यूबन सिगसा की कश ली। उनके एक करीबी दोस्त ने बताया कि उन्हें सिगार का स्वाद बेहद पसंद है।

ढेर सारे हॉलीवुड स्टार इसे पीते हैं लेकिन एक एथलीट का सिगार पीना अनजान सा लगता है लेकिन उन्हें कोई और लत नहीं है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
ब्रहस्पतिवार, ०३ दीम्बेर ००९
अंक- ८०९

02 December 2009

No smoking at IFFI venue, film stars told

No smoking at IFFI venue, film stars told
The Times of India, Panaji, Goa

[To read this news in Hindi Language, click here]

EXCERPT:
The National Organisation for Tobacco Eradication (NOTE) has taken objection to film stars smoking at the ongoing 40th International Film Festival of India (IFFI) venue here.

“Rajat Kapoor, Radhika Apte and other delegates were seen smoking within the INOX courtyard. This appeared in local newspapers. It is a violation of the Cigarettes and Other Tobacco Products Act (COTPA) 2003 which is operative in Goa since Oct 2, 2008,” Shekhar Salkar, the NOTE general secretary, said in a written complaint sent to the organisers.

The complaint was addressed to Manoj Srivastava, Chief Executive Officer (CEO) of the Entertainment Society of Goa (ESG), the co-host for IFFI along with the Directorate of Film Festivals.

While Rajat is here to promote his English film “And Once Again” directed by Amol Palekar, Radhika stars along with Rahul Bose in Bengali film “Antaheen”, a film screened at the festival’s Indian Panorama section.

NOTE has said that it was the organisers’ legal and moral responsibility to ensure that “film stars and VIPs not be seen smoking as the younger generation would imitate the actions of these heroes and become addicted to smoking which will damage their health”. Read more....

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Tambakoo Kills News Bulletin
Wednesday, 02 December 2009
issue- 808

आई एफ एफ आई में नही होगा धूम्रपान

आई एफ एफ आई में नही होगा धूम्रपान

भारत में हो रहे ४०वे अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में फिल्मी सितारों के धूम्रपान कराने पर, राष्ट्रीय तम्बाकू उन्मूलन संगठन (नोट) ने आपत्ति जतायी है।

स्थानीय समाचार पत्रों के अनुसार समारोह में भाग लेने आये रजत कपूर, राधिका आप्टे और अन्य प्रतिनिधि समारोह परिषर में धूम्रपान करते हुए देखे गये। यह २ अक्टूबर २००८ से गोवा में लागू "कोटपा" २००३ अधिनियम का उल्लघन है

“नोट” के सचिव, शेखर शलकर ने इस बात की लिखित शिकायत व्यवस्थापकों से की है। और शेखर जी का यह मानना है कि, व्यावास्थापको की यह नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है की वो यह सुनिश्चित करे कि, फिल्मी सितारें एवं विशिष्ट व्यक्ति धूम्रपान न करें ताकि युवा वर्ग उनकी नक़ल कर के धूम्रपान के प्रति आशक्त न हो।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
बुधवार, ०२ दिसम्बर २००९
अंक- ८०७

फुटबालर बेकहम के सपनों में कौन?

फुटबालर बेकहम के सपनों में कौन?
लोकतेज, सूरत, गुजरात

लंदन । क्या-क्या जानते हैं कि विश्र्व विख्यात ब्रिटिश फुटबाल स्टार डेविड बेकहम के सपनों में कौन आता है। नहीं? तो परेशान मतहों। चलिए हम ही बता देते हैं। खबर है कि उन्होंने सिगार के लिए अपने दिलोदिमाग में फंतासी बनाई है। एक समाचार पत्र के मुताबिक ३४ साल के मिडफिल्डर को जब उनकी पत्नी स्पाइस गर्ल विक्टोरिया ने घर में सिगरेट पीने से मना किया गया तो वह बाहर निकल आए और बगीचे में बैठ क्यूबन सिगसा की कश ली। उनके एक करीबी दोस्त ने बताया- उसे सिगार का स्वाद बेहद पसंद है। ढेर सारे हॉलीवुड स्टार इसे पीते हैं लेकिन एक एथलीट का सिगार पीना अनजान सा लगता है लेकिन उन्हें कोई और लत नहीं है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
बुधवार, ०२ दिसम्बर २००९
अंक- ८०६

कैसे बचें कैंसर से

कैसे बचें कैंसर से
नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली, दिल्ली

टिश्यू या शरीर के किसी अंग में सेल्स के अनियंत्रित मल्टीप्लीकेशन से कैंसर होता है। कभी- कभी शरीर के किसी किसी भाग में इससे गांठ हो जाती है। जब तक कोई अंग इससे पूरी तरह प्रभावित नहीं होता तब तक इसका पता भी नहीं चलता। कु छ मामलों में दर्द होता है और कुछ में भूख न लगना या वजन में गिरावट आती है। कैंसर तब होता है जब हमारे शरीर के जैनेटिक मेटिरियल कासिर्नोजेनिक सब्सटेंस से डेमेज हो जाते हैं।

कैंसर के तीन कॉमन कारण हैं
1. सिगरेट, शराब और कई तरह की प्लास्टिक के संपर्क में आना।
2. हाय फैट डायट। यह कई तरह के कैंसर का कारण बनता है।
3. बॉडी में फैट का पर्सेंटेज ज्यादा होना।

बचाव
ए. शराब और सिगरेट स्मोकिंग से बचें। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करें। अगर प्लास्टिक के बर्तन का इस्तेमाल माइक्रोवेव या खाना रखने के लिए कर रहे हैं तो अच्छी क्वालिटी का प्लास्टिक इस्तेमाल करें।

बी. अपने और परिवार के खाने पीने पर नियंत्रण रखें। यदि आपका नॉर्मल बॉडी वेट या परॉसेंटेज फेट ज्यादा है तो हाइ फेट खाना जैसे बटर, चीज, क्रीम कुकीज, केक, पेस्ट्रीज, पफ, पिज्जा, बर्गर, डीप फ्राइड फू ड, चिप्स, चाट, मिक्सचर, फ्राइड चिकन, रेड मीट, मटन, कीमा, सूअर का गोश्त आदि हफ्ते में एक बार से ज्यादा न खाएं। इनमें से कोई भी चीज रोजाना नहीं खानी चाहिए।

सी. यदि आप ओवरवेट हैं तो बताई गई चीजें तीन महीने तक अपनी डायट में से हटा दें ताकि आपका वजन सही हो जाए। रेगुलर कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग या जॉगिंग सभी के लिए जरूरी है।

डी. फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज (आटा, रोटी, होल वीट ब्रेड), मलाई रहित दूध, दही आदि चीजें कैंसर जैसी बीमारी का खतरा कम कर सकते हैं। साथ ही एक दिन में कम से कम पांच फल खाएं। जैसे एक फल सुबह के नाश्ते में ले और दूसरा शाम को छ: बजे या डिनर के बाद ले सकते हैं। आप फ्रेश सलाद लंच और डिनर में ले सकते हैं। इन सब में विटामिन ए, ई या सी होता है जो एंटिऑक्डडेंट के रूप में काम करते हैं। ये कैंसर से लड़ते हैं और उसे बढ़ने से रोकते हैं।

इन सब के अलावा ढाई से तीन लीटर तक पानी रोज पिएं। यह आपके शरीर से टॉक्सिक वेस्ट और दूषित पदार्थ हटा देता है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
बुधवार, ०२ दिसम्बर २००९
अंक- ८०५

01 December 2009

Drop in smoking cuts cancer deaths in Europe

Drop in smoking cuts cancer deaths in Europe
Reuters India News, India

[To read this news in Hindi language, click here]

EXCERPT:
A decline in smoking in Europe and better screening mean fewer people are dying of cancer, but lung cancer deaths in women are rising in places like Scotland and Hungary where more women smoke, doctors said on Monday.

Early diagnosis and better treatments have pushed down deaths from cervical cancer and breast cancer, and declining smoking levels contributed to large falls in deaths from lung and other tobacco-related cancers in men, according to a study in the Annals of Oncology cancer journal.

The study of data from 1990-1994 and 2000-2004 showed overall European cancer death rates fell by nine percent in men and eight percent in women in the second period from the first.

But researchers said there were wide disparities in cancer death rates between different EU countries, and said some countries where alcohol and tobacco consumption has increased had seen a rise in deaths from lung, mouth, pharynx and oesophagus cancers.

"Further reduction of tobacco smoking remains the key priority for cancer control in Europe," Cristina Bosetti, head of the cancer unit at Italy's Mario Negri department of epidemiology, wrote in the study. Read more...

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Tambakoo Kills News Bulletin
Tuesday, 01 December 2009
issue- 804

धूम्रपान में कमी से कैंसर से होने वाली मृत्यू में कमी

धूम्रपान में कमी से कैंसर से होने वाली मृत्यू में कमी

यूरोप में धूम्रपान में कमी होने से वहां पर कैंसर से होने वाली मृत्यू दर में कमी आई है। परन्तु स्कॉट्लैंड और हंगरी जैसे देशों में महिलाओं में धूम्रपान की आदत बढ़ाने के कारण पहले से अधिक महिलाएं फेफड़े के कैंसर के कारण मृत्यू का शिकार हो रही है।

“अन्नाल्स ऑफ़ ऑनकोलोजी" नमक कैंसर जरनल में छापे एक अध्ययन के अनुसार, समय से निदान और बेहतर उपचार से सर्विकल एवं ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मृत्यू डर में कमी आयी है। साथ ही पुरूषों में धूम्रपान के घटते स्तर से, उनमें तम्बाकू जनित फेफड़े एवं अन्य कैंसर की मृत्यू दर में भी कमी आयी है ।

१९९० -१९९४ और २०००-२००४ में हुये अध्ययन यह दर्शाते है की यूरोपे में परुषों और महिलायों में कैंसर से होने वाले मृत्यू डर में क्रमशः ९ प्रतिशत और ८ प्रतिशत की घटोत्री हुई है । लेकिन शोधकर्तायों का कहना है की, यूरोप के कुछ देशों में, जहाँ शराब और तम्बाकू का सेवन बढ़ा है, वहां फेफड़े, मुख और खाने की नाली के कैंसर से होने वाली मृत्यू दर बढी है.

इटली के मारियो नगरी अस्पताल के एपिडेमोलोजी विभाग की अध्यक्ष क्रिस्टीना बोसेती के अनुसार, यूरोपियन देशों में कैंसर पर नियंत्रण के लिए तम्बाकू सेवन और धूम्रपान में कटौती करने की आवश्यकता है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
मंगलवार, ०१ दिसम्बर २००९
अंक- ८०३

धूम्रपान के साथ सांस में चले जाते हैं जीवित जीवाणु

धूम्रपान के साथ सांस में चले जाते हैं जीवित जीवाणु
समय लाइव न्यूज़, नॉएडा, उत्तर प्रदेश

वाशिंगटन। धूम्रपान छोड़ने के लिए एक और कारण मिल गया है: अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि धूम्रपान करने वाले लोग जीवित जीवाणुओं को भी सांस में ले लेते हैं जिससे अनेक प्रकार के संक्रमण या अन्य बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

मैरीलैंड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, सिगरेट में सैकड़ों किस्म के जीवाणु पाये जाते हैं जिनमें ऐसे अनेक रोगाणु शामिल हैं जो फेफड़ों और श्वास संबंधी रोग पैदा कर सकते हैं। इससे पहले अनुसंधानकर्ता सिगरेट के रसायनों और उन चीजों के असर पर अपना ध्यान केन्द्रित करते थे जिनका उत्पादन तंबाकू के जलने पर होता है। लेकिन नये अध्ययन में सिगरेट में पाये जाने वाले जीवाणुओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया है और कहा गया है कि सिगरेट के कारण संक्रमण और बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
मंगलवार, ०१ दिसम्बर २००९
अंक- ८०२

कानून के रखवाले भी पीछे नहीं

कानून के रखवाले भी पीछे नहीं
सतीश शर्मा, दैनिक जागरण, पंजाब

नवांशहर ;सुप्रीम कोर्ट की ओर से सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान न करने के आदेशों की आम जनता तो क्या खाकी वर्दी वालों को भी परवाह नहीं है। कानून के रक्षक पुलिसकर्मी भी खुले तौर पर सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करते देखे जा सकते हैं। 'दैनिक जागरण' ने इससे पहले डीसी कांप्लेक्स व कचहरी कांप्लेक्स में खुले तौर पर धूम्रपान करने वालों की पोल खोली थी। अब तो शहर में पुलिस वाले भी खुलेआम धूम्रपान करते देखे जा सकते हैं। एसएसपी राकेश अग्रवाल का कहना है कि जिले में धूम्रपान निषेध एक्ट को गंभीरता से लागू करवाया जाएगा।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
मंगलवार, ०१ दिसम्बर २००९
अंक- ८०१
Contact email: tambakoo.kills@gmail.com