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22 June 2010

युवा ले रहे हुक्के का मजा

नवभारत टाईम्स, बेंगलुरु, कर्नाटक

बेंगलुरु के युवा इन दिनों मुगल काल की तर्ज पर एक नए तरह के का मजा ले रहे हैं और धूम्रपान की यह विधा उन्हें बडे़-बड़े कैफे उपलब्ध करा रहे हैं। धूम्रपान का यह तरीका है, हुक्का पीने का। शहर में इन दिनों कई हुक्का पार्लर खुल गए हैं, जो लोगों को पारंपरिक तरीके से सुगंधित धूम्रपान का मजा दिला रहे हैं। एक हुक्का पार्लर संचालक अश्विन ने बताया के धुएं के विपरीत सुगंधित तंबाकू से जो धुआं निकलता है, वह अच्छा और आरामदायक लगता है । अश्विन ने बताया कि वीकएंड में लगभग 50 से 100 लोग पार्लर में आते हैं। हुक्का तंबाकू के धूम्रपान का एकल या बहुस्तरीय उपकरण है, जिसमें धुआं पानी में से निकलने के कारण ठंडा हो जाता है।

कॉलेज छात्रा श्वेता के लिए हुक्का टाइमपास करने का एक तरीका और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती का एक साधन है। श्वेता ने बताया एक दिन छोड़कर एक दिन हुक्का पीने आते हैं। चूंकि हम धूम्रपान नहीं कर सकते, इसलिए हमें हुक्का एक स्वस्थ्य विकल्प लगा। हुक्का पीना भले ही कॉलेज के छात्रों को मौज-मस्ती का साधन लग रहा हो, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं हैं। स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक तीन से चार घंटे हुक्का पीने में जितना धुआं अंदर जाता है, वह कुछ सिगरेटों से कहीं ज्यादा होता है। हुक्का पार्लरों का माहौल भी युवाओं को खासा आकर्षित कर रहा है। पार्लरों में बजता मद्धिम संगीत, कम रोशनी और पारंपरिक माहौल युवाओं को काफी लुभा रहा है। ज्यादातर हुक्का पार्लरों में क्लींजर की तरह पानी का उपयोग होता है, लेकिन कई पार्लर इसके लिए वाइन सोड़ा, ड्रिंक्स और यहां तक कि दूध का भी उपयोग करते हैं। हुक्का पीने की कीमत चुने गए उत्पाद के आधार पर निर्भर होती है। ऐसे ही एक हुक्का पार्लर ने अपने परिसर के बाहर वयस्कों के लिये का बोर्ड लगा रखा है।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
मंगलवार, २२ जून २०१०
अंक- ९७७
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