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26 June 2010

दम तोड़ रही तम्बाकू की खेती

दैनिक जागरण, कूचबिहार, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल का कूचबिहार जिला तम्बाकू उत्पादन के लिए विख्यात है। यहां का तम्बाकू देश के कोने-कोने में जाता है, लेकिन इस खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी योजना नहीं है। यदि किसानों की मानें, तो यहां सरकार इस की खेती को बंद कराने पर तुली है। यदि यह खेती बंद हो गई तो सिर्फ कूचबिहार जिले में 15 लाख लोग बेकारी की दंश झेलेंगे। इस जिले में तम्बाकू के अलावा अन्य कोई उद्योग भी नहीं है। कूचबिहार जिले में लगभग सौ साल से पहले तम्बाकू की खेती कुछ ही परिवारों ने शुरू की। मांग और आय को देखते हुए धीरे-धीरे लोग इससे जुड़ते गए।

आज आलम यह है कि कूचबिहार जिले में सबसे बड़ा उद्योग के रूप में तम्बाकू की खेती ने अपनी पहचान बना ली है। परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इससे 15 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें व्यवसायी, किसान और मजदूर शामिल हैं। जिलेभर में दस लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन में तम्बाकू की खेती हो रही है। हालांकि आर्थिक तंगी और उन्नत खेती के प्रशिक्षण के अभाव के कारण उत्पादन जोर नहीं पकड़ रहा है। इससे किसानों में नाराजगी व्याप्त है। किसानों का कहना है कि सरकार इस उद्योग को बढ़ावा देने की जगह इसे समाप्त करने पर ही तुली हुई है।

किसान अब्दुल मियां, हरि सेन, गोपाल बसाक और कमल बर्मन आदि ने कहा कि सरकार तम्बाकू को लेकर राजनीति कर रही है। बड़े-बड़े विज्ञापन देकर यह कुप्रचार किया जा रहा है कि तम्बाकू के सेवन से जानलेवा बीमारियां होती हैं, जबकि कूचबिहार जिले में पीढ़ी दर पीढ़ी से लोग तम्बाकू की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक इस खेती जुड़ा एक भी व्यक्ति को वैसी बीमारी नहीं हुई। सरकार जानलेवा बीमारियों की जड़ ढूंढ़ने की जगह हमारी नींव खोद रही है।

जानकारी के अनुसार कूचबिहार जिले में हर साल लगभग 20 लाख टन तम्बाकू का उत्पादन होता है। हालांकि यह पहले इससे भी ज्यादा तम्बाकू का उत्पादन होता था। यहां से उत्पादित तम्बाकू ट्रकों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा आदि प्रदेशों में भेजा जाता है। यहां पर उत्पादित तम्बाकू के लिए बड़े-बड़े गोदाम भी बनाए गए हैं।

निकोटिन की मात्रा अधिक :
विशेषज्ञों के अनुसार कूचबिहार जिले में उत्पादित तम्बाकू में सबसे अधिक मात्रा में निकोटिन पाया जाता है। दूसरे स्थान पर गुजरात और तीसरे स्थान पर बिहार और उत्तर प्रदेश हैं।

दिसंबर में शुरू होती है खेती :
तम्बाकू की खेती साल के अंतिम महीने से शुरू होती है। खेत जोतकर उसमें तम्बाकू के बीज डाले जाते हैं। मार्च से पौधे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। यदि इस दौरान भारी बारिश हुई या ओले पड़े, तो खेती के बर्बाद होने का खतरा रहता है, क्योंकि तम्बाकू के पत्ते पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इस कारण किसानों को काफी नुकसान उठना पड़ता है। हालांकि परम्परा के अनुसार, कुछ तम्बाकू बसंत पंचमी के दिन बाजार में आ जाता है, लेकिन पूरी तरह से बाजार में यह मार्च द्वितीय सप्ताह से आता है।

तम्बाकू की होती है पूजा :
यहां व्यवसायी तम्बाकू को मां चामुंडा देवी का रूप मानते हैं। इसी धारणा के कारण बसंत पंचमी के दिन ही तम्बाकू की पूजा भी करते हैं।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शनिवार, २६ जून २०१०
अंक-९८२
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