दैनिक भास्कर, नई दिल्ली, दिल्ली
दुनिया में हर साल 17.1 करोड़ लोग दिल की बीमारी के चलते मर जाते हैं। इस वजह से हर साल 2 खरब डॉलर का चूना (उत्पादकता में नुकसान के रूप में) लगता है। उत्पादकता के कुल नुकसान में 40 फीसदी भागीदारी दिल की बीमारी की ही होती है। भारत का हाल भी बुरा है। भारत में दिल के मरीजों में करीब आधे 40 साल से कम उम्र के हैं। साल 2009 में भारत में करीब 10 लाख युवाओं की दिल की बीमारी से मौत हुई। वक्त रहते संभला नहीं गया तो देश की सबसे बड़ी पूंजी (जवानी) बर्बाद हो जाएगी।
वक्त रहते पता नहीं चलता
23 साल के प्रमोद को कभी भी ऐसा नहीं लगा कि उन्हें दिल की बीमारी भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि वह अपना 23वां जन्म दिन मना कर पार्टी से लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें काफी पसीना आने लगा। उन्होंने सोचा कि यह थकान के कारण है। घर लौटने के बाद उन्हें दिल में हल्का सा दर्द हुआ। प्रमोद को लगा कोई मामूली तकलीफ होगी, लेकिन दर्द बढ़ने पर जब वह अस्पताल गए तो पता चला कि दिल की एक धमनी में रुकावट है।
थोड़ी सी सावधानी
प्रमोद की ही तरह ज्यादातर युवाओं को काफी समय तक पता ही नहीं चलता कि वे दिल के मरीज हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनजीत जुनेजा बताते हैं कि ऐसा लापरवाही की वजह से होता है। युवा किसी बिल्डिंग की दो मंजिल तक चढ़ने में हांफने लगते हैं और उनकी सांस फूल जाती है तो निश्चित ही उन्हें अपना परीक्षण कराना चाहिए।
क्यों होता है ऐसा
दिल की बीमारी के मुख्य कारण हैं स्मोकिंग, तनाव, असंतुलित खान-पान और विटामिन बी-12 की कमी। डॉ. जुनेजा बताते हैं कि आज कल की जीवनशैली की वजह से युवाओं को तनाव कुछ ज्यादा ही रहता है। इससे उन्हें बचना चाहिए। संतुलित और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। योग को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजाना 35-40 मिनट की सैर और तंबाकू-सिगरेट-शराब से बच कर युवा खुद को दिल की बीमारी से बचा सकते हैं।
दिल का सबसे बड़ा दुश्मन तंबाकू
भारत में करीब 40 फीसदी युवा तंबाकू का किसी न किसी तरीके से सेवन करते हैं। करीब पांच फीसदी युवतियां भी तंबाकू का किसी न किसी प्रकार सेवन कर रही हैं। बीड़ी-सिगरेट पीने वाले हर 5 में से दो शख्स ऐसे हैं जो 24 घंटे में 5 से ज्यादा बीड़ी-सिगरेट पी जाते हैं। तंबाकू के इस्तेमाल और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह खानपान पर नियंत्रण कर और शारीरिक निष्क्रियता दूर कर असमय होने वाली 80 फीसदी मौत थामी जा सकती है।
‘युवाओं को दिल की बीमारी होने का पूरे परिवार, समाज और देश पर असर पड़ता है। इसकी रोकथाम के लिए जनजागरण की जरूरत है। लोगों को पता होना चाहिए कि इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है।’ - डॉ. अनिल कुमार, कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया के सदस्य
‘युवाओं के जीवन जीने के आधुनिक तरीकों के कारण दिल की बीमारियां इस वर्ग में बढ़ रही हैं। अनियमित भोजन, व्यायाम की कमी, तनाव, स्मोकिंग और शराब। दिल की बीमारी आमंत्रित करने के ये सभी कारण आज के युवाओं की जीवन शैली में मौजूद हैं।’ - डॉ. अशोक सेठ, हृदय रोग विशेषज्ञ, एस्कार्ट्स अस्पताल
60 फीसदी दिल के मरीज भारत में
भारत विश्व में दिल की बीमारी का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। दुनिया के दिल के मरीजों में से 60 फीसदी भारत में ही हैं। यह स्थिति अगले कुछ सालों में और बिगड़ेगी 2020 तक भारत में दिल के मरीजों की संख्या करीब 10 करोड़ को छू जाएगी।
यदि कहा जाए कि भारत में दिल की बीमारी महामारी की तरह फैल रही है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह बीमारी खासतौर पर शहरों और कस्बों में तेजी से लोगों को चपेट में ले रही है। हालांकि अब तक माना जाता रहा है कि केवल बुजुर्ग ही दिल के रोगी होते हैं, लेकिन भारत में बड़ी संख्या में युवा भी इस बीमारी की चपेट में हैं। देश में दिल के मरीजों की संख्या करीब 6 करोड़ है। इनमें से केवल 75,000 लोगों को ही इलाज की सुविधा मिल पाती है।
भारत में दिल की बीमारी बढ़ने का एक अहम कारण यह भी है कि यहां लोग खाने में तेल-घी जैसी वसायुक्त चीजें ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसकी तुलना में फल और सब्जियां कम खाते हैं। दिल के रोगों के विशेषज्ञ डॉ. सलीम युसूफ के अनुसार, आज कल लोग मेहनत नहीं करते। यह स्थिति शहर और गांवों, दोनों में है। इसीलिए गांवों तक में दिल की बीमारी धावा बोल चुकी है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार काम के स्थान पर तनाव के कारण भी दिल की बीमारियां हो रही हैं। फेडरेशन ने नियोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए विशेष निर्देश तैयार किए हैं ताकि वर्क प्लेस पर तनाव की स्थिति पैदा न हो।
‘ दिल की बीमारी ने भारत में काफी गंभीर रूप ले लिया है। अब समय आ गया है कि लोग इसके प्रति सतर्क हो जाएं।’ - डा जयदीप गुप्ता, हृदय रोग विशेषज्ञ, इंद्रप्रस्थ अस्पताल, नई दिल्ली
क्या कारण हैं तनाव के
तनाव के सामान्य कारणों में सामाजिक भय और आर्थिक भय प्रमुख हैं। व्यक्ति जो सोचता है वह आमतौर पर नहीं होता। यह भी तनाव का प्रमुख कारण है। अलग-अलग व्यक्तियों के तनाव में रहने के भिन्न-भिन्न कारण होते हैं। कोई व्यक्ति ईमानदार है लेकिन परिस्थितियां उसे बेईमान बना रही हैं। यह उस व्यक्ति के तनाव का कारण हो सकता है।
तनाव के दूसरे कारण हैं किसी परिचित रिश्तेदार की मौत, बीमारी, स्वयं या कोई नजदीकी किसी अपराध का शिकार, पारिवारिक कारण, सेक्स से जुड़ी समस्याएं, पत्नी, परिवार, दोस्तों से विवाद, नींद की कमी या अत्यधिक काम, माहौल में परिवर्तन जैसे नया स्कूल, नई काम की जगह, धन की कमी और बढ़ती जिम्मेदारी आदि।
कैसे कम होगा तनाव
तनाव दूर करने के दो मुख्य तरीके हैं। सामाजिक, पारिवारिक स्तर पर और व्यक्तिगत स्तर पर। युवाओं को सामाजिक और संस्थागत कार्यक्मों में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे उनका ध्यान सामान्य कामकाज के अलावा दूसरी तरफ भी बंट सके। शैक्षणिक संस्थाओं और काम करने के संस्थानों में भी युवाओं को योग और तनाव कम करने के दूसरे तरीकों के बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इसके अलावा युवाओं को भी व्यक्तिगत रुप से ऐसे लक्ष्य तय करने चाहिए, जो हासिल किए जा सकते हों। हासिल न किए जाने योग्य लक्ष्य तय कर असफल होने के बाद युवा ज्यादा परेशान होते हैं।
पूरा समाचार पढ़ने के लिये यहाँ पर क्लिक कीजिये
-----------------------------------------------------------------
तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन,
सोमवार, २७ सितम्बर २०१०
अंक- २०७६