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28 September 2010

सिगरेट निर्माता से 20 लाख वसूले

राजस्थान पत्रिका, जयपुर, राजस्थान

इन्दौर व भोपाल में बिना उत्पाद शुल्क चुकाए बिक रही सस्ती सिगरेट बनाने वाली नागौर स्थित फर्म पर कार्रवाई कर 20 लाख रूपए का उत्पाद शुल्क वसूला। यह कार्रवाई विभाग के आसूचना महानिदेशालय के दिल्ली से आए अधिकारियों ने की। अधिकारियों ने गत माह नागौर के सिगरेट व गुटखा निर्माता के 15 ठिकानों पर जांच की थी। सूत्रों ने बताया कि डायरेक्टर जनरल ऑफ सेन्ट्रल एक्साइज इंटेलिजेंस (डीजीसीईआई) के पास गुप्त सूचना थी कि इन्दौर व भोपाल में बंद दिखाई जा रही सिगरेट निर्माता कम्पनी की सिगरेट नागौर में बिना उत्पाद शुल्क चुकाए बनती व बिकती है।

डीजीसीईआई अधिकारियों ने नागौर की सिगरेट निर्माता कम्पनी मां संतोषी तम्बाकू पर छापा मार एक ट्रक सिगरेट जब्त की थी। बाद में कम्पनी के आग्रह पर डीजीसीईआई कार्यालय ने पिछले सप्ताह 20 लाख रूपए की उत्पाद शुल्क वसूलने के बाद ट्रक व माल की कीमत के समकक्ष बैंक बॉण्ड लेकर ट्रक व माल छोड़ दिया। हालांकि जब्त दस्तावेजों की जांच जारी है। डीजीसीईआई अधिकारियों को कम्पनी व इसके सहयोगी फर्म अकबरे आजम, रूपचन्द, मांगीलाल आदि ब्राण्ड के नाम से उत्पादित गुटखे में भी करोड़ों के गोलमाल की आशंका है।

17 रूपए का पैकेट आठ रूपए में
सिगरेट पर उत्पाद शुल्क सिगरेट की लम्बाई के आधार पर वसूला जाता है। मध्य प्रदेश व राजस्थान की कम्पनियां 17 रूपए मूल्य के सिगरेट वाली जिस पैकेट को आठ रूपए में बेच रही हैं, उस पर उत्पाद शुल्क ही करीब आठ रूपए होता है। साथ ही राज्य में कारोबारी मूल्य पर
बीस प्रतिशत वैट भी वसूला जाता है। बताया जाता है कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश व राजस्थान से आगे गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैल चुका है।

मिलते-जुलते नामों से धोखा
नागौर में डीजीसीईआई अधिकारियो को कलेण्डर, चांस, फोर ऎवर आदि नामों की सिगरेट मिली। यह देश भर में प्रसिद्ध ब्राण्ड कैवण्डर, चाम्र्स, फोर स्क्वायर आदि की नकल है। सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश में उत्पाद शुल्क चोरी की पोल खुलने के डर से इनका उत्पादन राज्य में शुरू हुआ।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन,
बुधवार, २९ सितम्बर २०१०
अंक- २०८५
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