नव भारत टाइम्स, नई दिल्ली, दिल्ली
लंदन: रोजाना 40 सिगरेट फूंकने वाले इंडोनेशिया के दो वर्षीय बच्चे ने अपनी इस लत से छुटकारा पा लिया है। पुनर्वास केंद्र में इलाज के बाद उसमें यह बदलाव आया। बाल संरक्षण अधिकारियों ने एल्डी रिजाल को इलाज के लिए रिहैब सेंटर भेजा था। तीन महीने के इलाज के बाद उसने अपनी यह लत छोड़ दी। अब वह किसी भी अन्य सामान्य बच्चे की तरह खेलता-कूदता है।
समाचार पत्र 'द सन' के मुताबिक पुनर्वास केंद में एल्डी अपनी अंतिम सिगरेट खत्म होने के बाद रोने लगता था और दीवारों पर सिर मारना शुरू कर देता था लेकिन उसे ऐसी ही स्थिति में छोड़ दिया जाता था। एल्डी के स्वास्थ्य पर स्मोकिंग के दुष्प्रभाव दिखने लगे थे, उसके हार्ट में धुएं की एक मोटी पर्त जम गई थी। वह अक्सर उदासीन दिखाई देने लगा था।
एल्डी जब 11 महीने का था तब उसके पिता ने एक सिगरेट उसके मुंह से लगा दी थी, तभी से उसने स्मोकिंग शुरू कर दी थी। एल्डी के माता-पिता अपने बेटे के प्रतिदिन के दो डिब्बी सिगरेट का खर्च नहीं उठा सकते थे और उसे इस लत से बाहर निकालने में मदद चाहते थे। अब उसकी मां का कहना है कि जो पैसा एल्डी की सिगरेट में चला जाता था अब उसका दूसरी जरूरतों में इस्तेमाल हो सकेगा।
पूरा समाचार पढ़ने के लिये यहाँ पर क्लिक कीजिये
--------------------------------------------------------------
तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन,
सोमवार, ०६ सितम्बर २०१०
अंक-२०४३