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11 September 2010

ऐसा जीवनसाथी जो सिगरेट ना पीता हो

महानगर टाइम्स, नई दिल्ली, दिल्ली

धूम्रपान से होने वाले नुकसान को लेकर लोग न केवल काफी जागरूक हो रहे हैं बल्कि ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो धूम्रपान न करने वाला जीवनसाथी चाहते हैं। इस मामले में मुंबई के युवाओं ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस के मौके पर एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि मुंबई में 90.26 फीसदी और दिल्ली में 89 .76 फीसदी युवाओं ने कहा कि वे ऐसे जीवनसाथी का हाथ थामना पसंद करेंगे जो धूम्रपान न करता हो। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जनता को जागरूक करने के लिए 31 मई को हर साल नो टोबैको डे मनाने की घोषणा कई साल पहले से ही कर रखी है।

दुनिया भर में प्रत्येक दस वयस्क लोगों की मौत में से एक मौत का कारण तंबाकू होता है। संभवत: यही कारण है कि शादी के बंधन में बंधने की योजना बना रहा युवा तबका अपने जीवनसाथी में तंबाकू का सेवन नहीं करने को भी एक अतिरिक्त योग्यता मानकर चल रहा है। सर्वेक्षण संस्था ने यह सर्वे मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे तथा कोलकाता में कराया जिसमें रोचक बात यह रही कि स्मोकिंग लाइफ पार्टनर को तरजीह देने के मामले में मुंबई के युवाओं ने 90.26 फीसदी के साथ दिल्ली के युवाओं को पीछे छोड़ दिया। बेंगलुरु में यह आंकड़ा 87.28 फीसदी, हैदराबाद में 87.41 फीसदी, चेन्नई में 88.75 फीसदी, पुणे में 89.68 फीसदी, कोलकाता में 70.58 फीसदी तथा अहमदाबाद में 91.29 फीसदी था।

अगर वैश्विक स्थिति पर नजर डालें तो धूम्रपान न करने वाले जीवनसाथी को तरजीह देने के मामले में कनाडा 98.78 फीसदी के साथ शीर्ष पर है जबकि भारत इस कुल औसत में 95.66 फीसदी के स्तर पर है। शादी डाट कॉम वेबसाइट के बिजनेस हेड गौरव रक्षित ने कहा, यह देखना सुखद है कि लोग इस बात की गंभीरता को समझते हुए धूम्रपान की आदत को छोड़ रहे हैं कि उस व्यक्ति पर इसका बुरा असर होगा जिसे वह जीवनसाथी के रूप में चुनने जा रहे हैं। सर्वेक्षण के आंकड़ों से यह बात भी साफ होती है कि दुनिया भर में धूम्रपान करने वालों में दस फीसदी भारत में निवास करते हैं और युवा ऐसे जीवनसाथी को तरजीह देने लगे हैं जो धूम्रपान नहीं करता हो या कभी कभार करता हो।

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन,
शनिवार, ११ सितम्बर २०१०
अंक-२०५८
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