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13 September 2010

मजाक बना तंबाकू निषेध कानून

दैनिक भास्कर, रांची, झारखंड

सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान अपराध है, इस कानून को लागू हुए दो वर्ष हो गए, पर सिटी में इसका असर नहीं दिखता। तंबाकू निषेध अधिनियम के लागू हुए दो साल हो चुके हैं। फिर भी शहर में इसका असर नहीं दिख रहा है। इस कानून के तहत सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट पीने के दंडात्मक प्रवाधानों से बेपरवाह लोग हर जगह धुएं के छल्ले उड़ाते देखे जा सकते हैं। कानून लागू कराने की जिम्ेमवारी जिस पुलिस विभाग पर है, वह इसे नजरअंदाज कर रही है।

दो अक्टूबर 2008 को अधिनियम लागू करने के समय तंबाकू व धूम्रपान के नकारात्मक प्रभावों को बड़े जोर-शोर से प्रचारित किया गया था। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों को दंडित करने की चेतावनी भी दी गई थी। कुछ दिनों के लिए स्कूलों और कॉलेजों के सामने सिगरेट और पान मसालों की बिक्री भी बंद हो गई। लेकिन बाद में सबकुछ पहले की तरह चलने लगा।

दो साल में केवल 15 धराए :

रांची में पिछले दो साल में सिर्फ 15 लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करते पकड़ा गया है। कानून के अनुसार, जिन सार्वजनिक स्थलों पर 20 से ज्यादा लोग हों वहां सिगरेट पीना या किसी रूप में तंबाकू ग्रहण करना अवैध है। स्कूल-कॉलेज और रेलवे स्टेशन के पास भी तंबाकू नहीं बेचा जा सकता। इन जगहों पर बेचते या इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर 200 रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

प्रचार पर 10 करोड़ खर्च :

तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 10 करोड़ रुपए खर्च किए। प्रचार के लिए हर जगह पोस्टर लगाए गए मगर नतीजा सिफर रहा। पुलिस का मौन रवैया कानून तोड़नेवालों का मददगार साबित हुआ। ञ्चशहर में धूम्रपान कहां हो रहा है, इसे रोकने का काम प्रशासन का है। हम सिर्फ लोगों को जागरूक कर सकते हैं।

-बीके सिंह, सिविल सर्जन, रांची

"सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान रोकने के लिए अभी अभियान नहीं चल रहा है। समय आएगा तो अभियान चलेगा, जुर्माना भी लगेगा।"

-शंभु ठाकुर, सिटी एसपी, रांची

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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
सोमवार, १३ सितम्बर २०१०
अंक-२०६०
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