दैनिक जागरण, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
-चिकित्सा विवि के दन्त संकाय ने कराया सर्वेक्षण
-दस हजार में से 263 में पाये गए कैंसर के शुरुआती लक्षण
विश्वविद्यालय में हुए सर्वेक्षण को यदि सामान्य रूप में कहा जाये तो तो राजधानी का हर पांचवां व्यक्ति किसी न किसी नशे का आदी है। इसमें सबसे ज्यादा संख्या गुटखा खाने वालों की है। उनकी संख्या भी कुछ कम नहीं है, जो गुटखा खाने के साथ सिगरेट और शराब भी पीते हैं। इसकी वजह से उनमें मुंह के कैंसर समेत दांतों की अन्य बीमारियां जन्म ले रही हैं। चिकित्सा विवि के दन्त संकाय की ओर से कराये गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आए हैं।
चिकित्सा विवि के दन्त चिकित्सा संकाय की डा.दिव्या मेहरोत्रा ने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत बीती पहली अप्रैल से राजधानी के पुराने इलाकों में एक सर्वेक्षण कराया गया। इसमें एक दन्त रोग विशेषज्ञ के साथ कुछ अन्य लोगों को घर-घर भेजकर यह मालूम करने की कोशिश की गई कि कितने लोग नशा करते हैं। डा.मेहरोत्रा के मुताबिक अध्ययन के बाद यह सामने आया कि दस हजार से लगभग दो हजार लोग तम्बाकू, सुपारी, गुटखा, शराब या किसी अन्य तरह का नशा करते हैं। नशा करने वाले दो हजार लोगों में से 1500 गुटखा खाते थे। सर्वेक्षण के दौरान एक हजार लोगों ने कहा कि उन्होंने गुटखा खाना महीने भर के अन्दर छोड़ा है। इन दस हजार में 263 लोगों में कैंसर के शुरुआती लक्षण पाये गए, वहीं 390 में मुंह व दांत से जुड़ी कोई न कोई बीमारी थी।
इन इलाकों में हुआ सर्वेक्षण
गणेशगंज, सरदार पटेलनगर, मशकगंज, गोलागंज पीर जलील, नाका, राजेन्द्रनगर और अमीनाबाद समेत कई अन्य इलाकों के 70 हजार लोगों में सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से दस हजार पर अध्ययन पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट में डा.दिव्या मेहरोत्रा के साथ, सर्जरी विभाग के प्रो.संदीप कुमार और डा.शैलेन्द्र कुमार शामिल हैं।
लम्बे समय तक छाले रहना कैंसर का लक्षण
इस सर्वेक्षण का उद्देश्य है कि मुंह के कैंसर का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सके और उसका इलाज किया जा सके। दन्त विशेषज्ञों के मुताबिक लम्बे समय तक मुंह के अन्दर छाले रहना, वजन तेजी से घटना और मुंह पूरा न खुलना कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
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तम्बाकू किल्स न्यूज़ बुलेटिन
शनिवार, १८ सितम्बर २०१०
अंक-२०७१